आज की ताजा खबर

फर्जी चयन से फर्जी वेतन तक! कनोडिया कॉलेज में शिक्षा माफिया का खेल उजागर

top-news top-news


कुशीनगर। शिक्षा का मंदिर कहे जाने वाला जनपद के कप्तानगंज स्थित श्री गंगा बक्श कनोडिया इंटरमीडिएट कॉलेज के शिक्षक श्याम नरायण पाण्डेय, विरेन्द्र पाण्डेय व बर्खास्तगी के बाद तथ्य गोपन कर नौकरी कर रहे सहायक अध्यापक देवेन्द्र पाण्डेय  की कारगुजारी के कारण भ्रष्टाचार की मंडी में तब्दील हो गया है। यहा इन शिक्षको द्वारा भ्रष्टाचार, फर्जीवाड़े और सरकारी धन की लूट की होड मची है। सहायक अध्यापक श्याम नारायण पाण्डेय, विरेन्द्र पाण्डेय और देवेन्द्र पाण्डेय द्वारा विनियमितकरण से पूर्व नियमों को रौंदते हुए फर्जी तरीके से चयन वेतनमान का लाभ लेकर सरकारी खजाने से लाखों रुपये हड़पने का सनसनीखेज खुलासा के बावजूद विभाग-ए-शहंशाह धृतराष्ट्र बने बैठे है। यही वजह है कि डीआईओएस कटघरे मे आ गया है। 
आरोप है कि सहायक अध्यापक श्याम नरायण पाण्डेय, विरेन्द्र पाण्डेय व बर्खास्तगी के बाद तथ्य गोपन कर नौकरी कर रहे सहायक अध्यापक देवेन्द्र पाण्डेय ने कूटरचित अभिलेखों और फर्जी तथ्यों के सहारे चयन वेतनमान हासिल किया, जबकि वे इसके पात्र ही नहीं थे। इतना ही नही, श्याम नरायण, विरेंद्र और देवेन्द्र यह वही शिक्षक हैं जिन्होंने जुलाई - 2012 से जून-2014 तक (करीब दो वर्ष) विद्यालय का मुंह तक नहीं देखा, फिर भी फर्जी उपस्थिति पंजिका के दम पर लाखों रुपये का एरियर निकालकर सरकार को खुली चुनौती दी है। सवाल यह नहीं कि यह घोटाला हुआ, सवाल यह है कि यह सब कैसे, किसकी शह पर और किसके संरक्षण में हुआ? सूत्रो का कहना है कि इन शिक्षको द्वारा एक या दो बार नहीं, बल्कि बार-बार सरकारी तंत्र को ठगने का घृणित खेल खेला गया, और विभागीय अधिकारियों की चुप्पी ने इस खेल को और भी बेखौफ बना दिया। कहना ना होगा कि कनोडिया इंटर कालेज मे 
फर्जीवाड़े का यह सिलसिला लंबे समय से चल रहा है, लेकिन शिकायतों और तथ्यों के सामने आने के बावजूद जिम्मेदार अधिकारी सूरदास बने बैठे है। मजे की बात यह है कि मामले के खुलासे के बाद डीआईओएस द्वारा  सहायक अध्यापक श्याम नरायण पाण्डेय, विरेन्द्र पाण्डेय और देवेन्द्र पाण्डेय के खिलाफ अब तक कोई कार्रवाई क्यो नही की गयी? 

जानकार बोले

जानकारों का कहना है कि कूटरचित,फर्जी दस्तावेज के सहारे तथ्य गोपन कर विनियमितकरण से पूर्व 
चयन वेतनमान का लाभ लेकर लाखो रुपये सरकारी खजाना लूटने का कृत्य जघन्य भ्रष्टाचार व अपराध की श्रेणी में आता है। ऐसे मे डीआईओएस को तत्काल इस प्रकरण को गंभीरता से लेते हुए आरोपी शिक्षको श्याम नरायण, वीरेंद्र पाण्डेय व देवेन्द्र पाण्डेय से स्पष्टीकरण लेकर वेतन वाधित करके शासन से मार्गदर्शन लेते हुए कार्रवाई करते। किन्तु डीआईओएस द्वारा अब न तो इन शिक्षको के विनियमितकरण से पूर्व प्राप्त हो हुए चयन वेतनमान का लाभ से संबंधित आरोप की जांच करायी गयी और न ही दो वर्ष बिना कार्य किये  सरकारी खजाने से एरियर के रूप मे लूटे गये लाखो रुपये की जांच कर रिकबरी करायी गयी और न ही विद्यालय का मूल उपस्थिति पंजिका देखा गया। ऐसे में सवाल यह उठता है कि आखिर किसके संरक्षण में यह खुली लूट की होड मची हुई है? क्या बिना विभागीय मिलीभगत के वर्षों तक फर्जी उपस्थिति और अवैध वेतन भुगतान संभव है? क्या विभागीय लिपिक की साठगाठ और अधिकारियों के  सहमति के बिना विनियमितकरण  (स्थायीकरण) से पूर्व चयन वेतनमान का लाभ प्राप्त करना संभव है? 

वर्ष 2008 में लगा चयन वेतनमान और विनियमितकरण 2018 मे 

सूत्र बताते है कि श्याम नरायण पाण्डेय, वीरेंद्र पाण्डेय व देवेन्द्र पाण्डेय ने फर्जीवाड़ा व तथ्य गोपन कर तत्कालीन जिला विद्यालय निरीक्षक कुशीनगर पुष्पा रानी श्रीवास्तव के समक्ष अपनी पत्रावली प्रस्तुत कर वर्ष 2008 में चयन वेतनमान का लाभ प्राप्त किया जबकि बिना विनियमितकरण का चयन वेतनमान का लाभ नही मिल सकता है। विभागीय जानकारो की माने तो सहायक अध्यापक श्याम नरायण पाण्डेय ,वीरेंद्र पाण्डेय व देवेन्द्र पाण्डेय का विनियमितकरण वर्ष 2018 मे हुआ है शासनादेश के मुताबिक इन शिक्षको को वर्ष 2028 में चयन वेतनमान का लाभ मिलना चाहिए, फिर वर्ष 2008 से यह तीनो शिक्षक चयन वेतनमान का लाभ कैसे प्राप्त कर रहे है ? बताया जाता है फर्जी तरीके से चयन वेतनमान का लाभ उठा रहे इन शिक्षको ने अब तक लाखो लाख रुपये सरकार का चूना लगाया है जिसकी रिकबरी जनहित मे लाजमी होगा।

https://lokbharti.co.in/ad/adds.jpg

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *